Hlo दोस्तो इस पोस्ट में आप पढ़े गए teej mela, भारत में teej festival बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है teej festival के दिन Teej mela ka आयोजन होता है

Teej mela
Teej mela

Teej festival

राजस्थान का तीज का मेला राजस्थान संस्कृत रंगीला प्रदेश है इस कारण राजस्थान को रंगीला प्रदेश कहते हैं राजस्थान में वर्ष भर अनेक त्यौहार उत्सव मेले मनाए जाते हैं यहां पर अनेक मेलों का आयोजन होता है इनमें से एक है गणगौर और तीज का मेला राजस्थान में गणगौर तीज का मेला अत्यधिक प्रसिद्ध है

तीज मेले का स्थान

राजस्थान में teej mela श्रावण मास की तीज को लगता है इसको छोटी तीज भी कहते हैं यह मेला तीज और चौथ को जयपुर के त्रिपोलिया बाजार गणगौरी बाजार तथा चौगान में लगता है मेले में हजारों की संख्या में लोग उपस्थित होते हैं तथा विदेशी पर्यटन भी इस मेले में भाग लेते हैं कुछ पर्यटन मेले में राजस्थान की सांस्कृतिक वेशभूषा में भाग लेते हैं तथा राजस्थान की संस्कृति विरासत का प्रदर्शन करते हैं तथा राजस्थानी संस्कृति का रंगा रंग रूप अपने कैमरों में कैप्चर करते हैं विदेशी पर्यटक बड़े हर्षोल्लास से मेले में भाग लेते हैं तीज माता का दर्शन करते हैं

मेला स्थान की जगह वह बरामदे लोगों से भर जाते हैं शाम को 6:00 बजे चंद्र महल सिटी प्लेस से चलकर त्रिपोलिया दरवाजे से तीज माता की सवारी बड़ी धूमधाम से निकलती है तीज माता की सवारी पालकी में निकलती है वे लोग आगे पीछे तीज माता का जयकारा लगाते हैं यह सवारी छोटी चौपड़ का चक्कर लगाकर गणगौरी दरवाजे से चौगान के रास्ते तालकटोरा तक जाता है जो गांव में भी मेला भरता है वहां पर कुंवारी युवतियां झूला झूलती है तथा वहां पर कई तरह के तमाशे दिखाई जाते हैं लोग मेले का आनंद लेते हैं तीज माता का मेला लगने से स्थानीय लोगों को रोजगार मिल जाता है

तीज माता मेले का दृश्य

Teej ke mela का दृश्य बड़ा ही सुहाना वह मनमोहक होता है सभी नर नारी, बालक, वृद्ध आकर्षक कपड़े पहन कर teej mela में उपस्थित होते हैं आसपास के गांव के लोग जगह-जगह झुंड बनाकर लोकगीत गाते है वह नृत्य करते हैं

Teej mela उपसंहार

मेले त्यौहार से अनेक लाभ होते हैं इनसे हमारे ज्ञान की वृद्धि होती है तथा सांप्रदायिक सद्भाव बढ़ता है मेलों से लोगों का मनोरंजन होता है रोजगार के अवसर प्राप्त होते हैं देश विदेश से लोगों का आगमन होता है इससे विदेशी मुद्रा भी देश में निवेश होती है सरकार के राजस्व में वृद्धि होती है तथा राजस्थानी संस्कृति का देश विदेश में प्रसार होता है

छोटी तीज कब मनाई जाती है

छोटी तीज सावन की तीज को कहते हैं यह श्रावण मास की तीज को बनाई जाती है मनाई जाती है

सातुड़ी तीज कब मनाई जाती है

सातुड़ी तीज भाद्रपद कृष्णा तृतीय को मनाई जाती है यह रक्षाबंधन के 3 दिन बाद मनाई जाती है सातुड़ी तीज को बुड्ढी तीज भी कहा जाता है इसे यूपी एमपी राजस्थान बिहार राज्यों के लोग बड़ी धूमधाम से मनाते हैं तथा तीज माता का पूजन करते हैं व् तीज माता की सवारी निकालते हैं

कजली वन

कजली वन भारत के मध्य भाग में होता था

निष्कर्ष

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