bhagwat katha

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Shrimad Bhagwat Katha

श्रीमद् भागवत कथा में 12 स्कंध है और 18000 श्लोक है भागवत कार श्री वेदव्यास जी ने पदम पुराण में भागवत के महा महात्म्य का वर्णन किया है जो इस महा ग्रंथ के प्रारंभ में में स्थित है यह एक मनोवैज्ञानिक सत्य है कि किसी कार्य से प्राप्त होने वाले लाभ को जाने बिना व्यक्ति उसमें पर परव्रत नहीं होता इसलिए सर्वप्रथम भागवत के स्वाध्याय एवं श्रवण की महत्ता को रेखांकित किया गया है

प्रथम स्कंध

में मंगलाचरण भी अनंत अभिनव ढंग से प्रस्तुत किया गया है सामान्यतः मंगलाचरण में किसी अवतार देवी देवता या परमात्मा की किसी श्री श्री विग्रह की वंदना की जाती है परंतु श्रीमद् भागवत में मंगलाचरण जिस रूप में प्रस्तुत हुआ है वह विश्व के सभी धर्मों का आधार है श्री वेदव्यास जी लिखते हैं सत्यम परम धीमहि अर्थात सत्य स्वरूप परमात्मा का हम ध्यान करते हैं इसमें परमात्मा की किसी स्वरूप का उल्लेख नहीं किया गया है यह इस दिव्य ग्रंथ के सर्व भौम होने का प्रमाण है गीता की भांति भागवत ग्रंथ भी केवल भारतीय हिंदू अथवा किसी संप्रदाय विशेष के लिए नहीं है अपितु यह तो सारे संसार के मनुष्य के कल्याण के लिए हैं,चराचर प्राणियों के कल्याण के लिए है।

पहला है सूत जी व सोनक जी का दूसरा है सनकादी _ नारद जी का

तीसरा है सुखदेव जी एम राजा परीक्षित का

प्रमुख संवाद सुखदेव जी व परीक्षित का है

भागवत सही अर्थों में एक दिव्य जीवन शास्त्र है इसमें जीवन के अहम प्रश्न उठाए गए हैं उनके समाधान प्रस्तुत किए गए हैं यह दोनों ही जीवन के मौलिक प्रश्न है और इनी के उत्तर में जीवन का रहस्य, जीवन का लक्ष्य, समाहित है भागवत की विविध कथाएं, विविध प्रसंग इन्हीं प्रश्नों के उत्तर बड़े सुंदर ढंग से प्रस्तुत करते हैं इसलिए भागवत एक अनुपम शास्त्र है जीवन का महत्वपूर्ण मार्गदर्शक है प्रत्येक मनुष्य को श्रद्धा से इसका स्वाध्याय करना चाहिए

द्वितीय स्कंध के नवे अध्याय में भगवान ने ब्रह्मा जी को चतुश्लोकी भागवत का उपदेश दिया है इसके माध्यम से भगवान ने अपनी सर्व व्यापकता को समझाया है संसार में ईश्वर के अतिरिक्त कुछ है ही नहीं। यह संपूर्ण सृष्टि भगवान का ही प्रतिरूप है पूरे चराचर जगत में परमात्मा ही समाया हुआ है

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